बगदाद, 30 सितंबर 2026: अमेरिका ने इराक में अपनी बची हुई सैन्य मौजूदगी को समाप्त करते हुए देश में स्थित अपने अंतिम ठिकानों से सैनिकों की वापसी पूरी कर ली है। इसके साथ ही इराक में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के दो दशक से अधिक लंबे दौर का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है।
अमेरिका और इराक के बीच 2024 में हुए समझौते के तहत अमेरिकी नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के सैन्य मिशन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की योजना बनाई गई थी। अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद इराकी सुरक्षा बलों पर देश की सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।
ईरान समर्थित समूहों की भूमिका पर सवाल
अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बीच इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों के प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, इन समूहों ने अमेरिकी सैन्य वापसी को अपनी रणनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा है।
वहीं, कुछ इराकी अधिकारियों और सुरक्षा विश्लेषकों ने आशंका जताई है कि अमेरिकी सैन्य और खुफिया सहायता में कमी आने से इराक की सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
ISIS को लेकर भी चिंता
अमेरिकी सैन्य वापसी के साथ इस्लामिक स्टेट (ISIS) की संभावित गतिविधियों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। Reuters के मुताबिक, अमेरिकी बलों की निगरानी और खुफिया क्षमताओं की उपलब्धता कम होने के बाद ISIS के फिर से संगठित होने के खतरे पर सुरक्षा अधिकारियों और विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं।
हालांकि, इराकी सुरक्षा बलों ने पिछले वर्षों में आतंकवादी संगठनों के खिलाफ अपनी क्षमताओं को मजबूत किया है और अब देश की आंतरिक सुरक्षा में उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।
इराक के सामने नई सुरक्षा चुनौती
अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद इराक को अपनी सुरक्षा व्यवस्था को अधिक स्वतंत्र रूप से संचालित करना होगा। बगदाद के सामने एक साथ कई चुनौतियां हैं—ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों का प्रभाव, ISIS का खतरा और क्षेत्रीय तनाव।
आने वाले समय में इराकी सरकार और सुरक्षा बलों की क्षमता इस बात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी कि अमेरिकी सैन्य उपस्थिति समाप्त होने के बाद देश में सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता किस तरह बनाए रखी जाती है।
